80 प्रतिशत से अधिक टीआईआर वाले डायबिटीज से पीड़ित लोग आईसीयू में कम समय बिताते हैं: अध्ययन

Updated on 14-06-2023 11:54 PM
भोपाल : हाल ही में प्रकाशित अखिल भारतीय कन्सेंसस पेपर से पता चलता है कि कॉन्टिन्युअस ग्लूकोज मॉनीटरिंग उपकरणों से जनरेट टाइम-इन-रेंज डेटा एक शक्तिशाली मेट्रिक है जिसका उपयोग डायबिटीज से पीड़ित लोग अपने ग्लाइसेमिक नियंत्रण को सुचारू रखने और सही निर्णय लेने के लिए कर सकते हैं टीआईआर उस समय का प्रतिशत भाग होता है जब किसी व्यक्ति का ग्लूकोज मान अनुशंसित लक्ष्य सीमा के भीतर होता है और ग्लूकोज लेवल में गतिशील उतार चढ़ाव को कैद करने में प्रभावी होता है।
डॉ. प्रशांत सुब्रमण्यम, चिकित्सा मामलों के प्रमुख उभरते एशिया और भारत एबट डायबिटीज केयर ने कहा का कहना है जीवन बदलने वाली तकनीक और नवाचार के साथ डायबिटीज की देखभाल में बहुत विकास हुआ है कॉन्टिन्युअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण भारत में डायबिटीज प्रबंधन को बेहतर कर सकते हैं ग्लूकोज रीडिंग के साथ लोगों को सशक्त बना सकते हैं टाइम इन रेंज जैसे मेट्रिक्स के साथ अनूठी जानकारी प्रदान कर सकते हैं यह लोगों को सही मार्गदर्शन करने वाले रुझानों से अवगत करा सकता है जहाँ अपने ग्लूकोज के स्तर को बेहतर ढंग से नियंत्रण में रखने के लिए अपनी जीवनशैली या उपचार में सही समय पर सही फैसला लेने में उन्हें मदद मिलेगी।
डॉ. मयूर अग्रवाल, डायरेक्टर, हॉर्मोन इंडिया डायबिटीज एंड एंडोक्राइन सेंटर, अपोलो भोपाल ने कहा, “भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डायबिटीज से ग्रसित लोगों की आबादी है, इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि डायबिटीज से पीड़ित लोग अपने उपचार और अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से और प्रबंधित करने के लिए उपलब्ध उपकरणों का उपयोग कैसे कर सकते हैं। कॉन्टिन्युसअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग जैसे विकल्प बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इस तरह के समाधान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह व्यक्तिगत और कार्रवाई योग्य जानकारी के साथ अपने ग्लाइसेमिक नियंत्रण को बेहतर बनाने में अधिक लोगों की मदद करते हैं ताकि वह एक बेहतर जीवन जी सकें।”
आज, पहले से कहीं ज्यादा डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए नई मॉनिटरिंग तकनीकें उपलब्ध हैं। कॉन्टिन्यु अस ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरणों के आने से, लोग देख सकते हैं कि उनके ग्लूकोज का स्तर ऊपर या नीचे चल रहा है या नहीं, और इन्हीं रुझानों से वह उनके भोजन और व्यायाम के बारे में समझदारी से निर्णय लेते हैं। बार-बार उंगली में प्रिक कराने से राहत देने के अलावा, सीजीएम उपकरण किसी व्यक्ति के डायबिटीज पर नियंत्रण को निर्धारित करने में भी सहायक होते हैं। 70मिलीग्राम/डीएल और 180मिलीग्राम/डीएल  के बीच टाइम इन रेंज में बिताए गए समय के भाग को देखकर जिसे अक्सर स्वीट स्पॉट के रूप में जाना जाता है व्यक्ति यह समझ सकता है कि डाइट, भोजन और दवाओं का ग्लूकोज नियंत्रण पर कैसे असर होता है। अक्सर, प्रत्येक दिन में लगभग 17 घंटे या 70 प्रतिशत एक सही टारगेट समय होता है ।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि टारगेट समय सीमा में रहकर, डायबिटीज से ग्रसित लोग इस बीमारी से जुड़ी विभिन्न जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। इस कन्सेंसस स्टडी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे 80 प्रतिशत से अधिक टीआईआर वाले डायबिटीज रोगियों में घाव के संक्रमण का जोखिम बहुत कम होता है और वह आईसीयू में कम समय बिताते हैं। इसके अतिरिक्त, टीआईआर में 10 प्रतिशत की कमी भी डायबिटीज से संबंधित नेत्र रोगों के जोखिम को 64 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है और किसी के मूत्र में एल्ब्यूमिन प्रोटीन के स्तर को 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है, जोकि गुर्दे की बीमारी का सूचक हो सकता है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 22 April 2026
इंदौर।  इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), गंभीर COPD, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, ब्रोंकिएक्टेसिस और केमिकल पॉइजनिंग जैसे मामलों में लंग ट्रांसप्लांटेशन जीवन रक्षक साबित हो रहा है। समय पर इलाज और सही रेफरल…
 21 April 2026
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को एक और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा आयोजन की मेजबानी मिलने जा रही है। शहर में चौथी ब्रोंकोपुलमोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 3 से 5 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस तीन दिवसीय…
 21 April 2026
इंदौर। विश्व लिवर दिवस 2026 के अवसर पर केयर सीएचएल हॉस्पिटल इंदौर में “लिवर हेल्थ एंड अवेयरनेस प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने लिवर…
 10 April 2026
इंदौर: विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, एचसीजी इंदौर ने जागरूकता पहल शुरू की, जो इसके आधिकारिक लॉन्च का भी प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य कैंसर की रोकथाम हेतु स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान…
 09 April 2026
इंदौर: यूनिक हॉस्पिटल ने आर्थोपेडिक जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट के लिए अत्याधुनिक मिसो (MISSO) रोबॉटिक प्रणाली की शुरुआत की है। इसी वर्ष 1 जनवरी से शुरू हुई यह एआई - आधारित उन्नत…
 06 April 2026
भोपाल : भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं, लेकिन इसके लक्षण शुरू होने और सही पहचान होने में औसतन 6 साल से अधिक का समय लग…
 28 March 2026
इंदौर। बच्चों की हिम्मत, जज़्बे और मुस्कान को समर्पित ‘लिटिल चैंपियंस मीट’ का आयोजन केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में लगभग 20 बच्चों और…
 26 March 2026
इंदौर: शहर में पहली बार एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शैल्बी हॉस्पिटल की ट्रांसप्लांट टीम ने ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण एक ही दिन…
 21 March 2026
इंदौर: एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल, इंदौर ने महिलाओं के स्वास्थ्य, कैंसर की प्रारंभिक पहचान के महत्व और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दो दिवसीय “विमेन हेल्थ मेला” का…
Advt.