जबलपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों में चार सीट ग्रामीण हैं। इस आर्टिकल में हम 2023 के चुनाव के नजरिए ग्रामीण क्षेत्र की पनागर विधानसभा सीट की हर वो बात बताने जा रहे है, जो आपको जानना बेहद जरुरी हैं। क्योकि हर चुनाव में एक-एक सीट बेहद मायने रखती हैं। पनागर विधानसभा ओबीसी बहुल सीट है, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाता भी रहते हैं। साल 2008 से पहले यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित थी। परिसीमन के बाद यह सामान्य सीट में तब्दील हो गई। इसके आदिवासी बहुल अनेक क्षेत्र परिसीमन के दौरान सिहोरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कर दिए गए और सिहोरा को अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कर दिया गया। पनागर विधानसभा में पटेल समाज के मतदाता सर्वाधिक हैं, उनके अलावा यादव और अन्य ओबीसी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
पनागर विधानसभा क्षेत्र पूर्ण रूप से हिंदू बहुल सीट है, कुछेक इलाकों मसलन अमखेरा से सटी बस्तियों में मुस्लिम मतदाता निवास करते हैं, लेकिन यहां हिंदू वोट खासकर ओबीसी वोट ही निर्णायक हैं। पनागर विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर कृषक वर्ग निवास करता है। सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो यहां पर 18 फीसद सवर्ण समाज निवासरत है। जिनमें 6 फीसद ब्राम्हण, 5 फीसद क्षत्रिय, बाकी के 7 फीसद मतदाता वैश्य समाज से हैं। ओबीसी वोटर्स यहां निर्णायक हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या में पटेल मतदाता मौजूद हैं। उनके बाद यादव मतदाता काफी अधिक हैं। 15 फीसद के करीब आदिवासी मतदाता भी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। पनागर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के राजेश पटेल की जीत सुनिश्चित है।
इस क्षेत्र में 80 फीसद क्षेत्र कृषि क्षेत्र है लिहाजा इस क्षेत्र में लोगों की आमदनी का मुख्य स्त्रोत खेती ही है। खेती के अलावा पशुपालन, डेयरी उद्योग क्षेत्र के लोगों की आमदनी का जरिया है। पनागर विधानसभा क्षेत्र मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही अस्तित्व में आया था। पूर्व में यह सीट सामान्य थी, फिर परिसीमन के उपरांत इसे अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कर दिया गया। इस क्षेत्र से कांग्रेस की कौशल्या गोंटिया और बीजेपी से मोती कश्यप मध्यप्रदेश शासन में मंत्री रह चुके हैं। पनागर विधानसभा क्षेत्र की खास पहचान पनागर का उपनगरीय इलाका है।जबलपुर जिले की पनागर विधानसभा सीट का चुनाव इसलिए दिलचस्प है कि यह भाजपा का गढ़ है। 2018 के चुनाव में सुशील कुमार तिवारी (इंदू भैया) 41 हजार 733 वोटों से चुनाव जीते थे। भाजपा प्रत्याशी सुशील कुमार तिवारी को 84,302 वोट मिले थे, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार भरत सिंह यादव को 42569 वोट मिले थे। इस बार भी सुशील कुमार तिवारी भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं और कांग्रेस ने राजेश पटेल को प्रत्याशी बनाया है।
इस बार भाजपा की अंदरूनी कलह और गुटबाजी ही कांग्रेस को जीत दिलाएगी। राजेश पटेल की स्वच्छ छवि और गंभीर स्वभाव जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाता है