
भोपाल : भूविज्ञान के विविध आयामों को हिन्दी भाषा में जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण राज्य इकाई द्वारा द्वितीय क्षेत्रीय भूविज्ञान तकनीकी राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “मध्यांचल का भूसंरचनात्मक, विवर्तनिकी अध्ययन एवं भूवैज्ञानिक संसाधनों की उपलब्धता और गणनात्मक आकलन” था । संगोष्ठी में भूवैज्ञानिकों एवं खनिजविदों के द्वारा हिन्दी में 22 शोधलेखों प्रस्तुत किये गए। संगोष्ठी के शुभारम्भ अवसर पर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक सूरज डो पाटभाजे ने कहा कि अपर महानिदेशक सूरज डो पाटभाजे ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य है कि आम लोगो में सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली से परिचित हों। हिंदी में इस आयोजन के करने से सर्वेक्षण के कार्य में और भी सरलता होगी।संगोष्ठी में कुल चार तकनीकी सत्र आयोजित किये गए। संगोष्ठी में मध्य प्रदेश के सागर और छतरपुर जिले के मरदेवरा-हीरापुर क्षेत्र के ग्रेनाइट में शियर सेंस संकेतक, झाबुआ बेल्ट के पोस्ट अरावली ग्रेनेटोइडस : विश्लेषण और विशेषतायें , शिवपुरी जिले में धूनी और टोरी क्षेत्रों के आसपास ताय, मॉलिब्डेनम एवं टंगस्टन का खनिजीकरण और सिंगरोली घाटी के बाराकार शैल समूह में जलोढ-नदी मुहाने पर घाटी का विकास और कोपले के जमाव का अध्ययन शीर्षक के अलावा अन्य राज्यों से सम्बंधित खनिज विषयों पर आधारित शोधपत्र प्रस्तुत किये गए । इस श्रृंखला की प्रथम संगोष्ठी नागपुर में आयोजित की गयी थी जिसमें26 शोधपत्रों का प्रस्तुतीकरण किये गए थे । संगोष्ठी का आयोजन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, मध्य क्षेत्र, नागपुर के तत्वावधान में तथा जनार्दन प्रसाद, महानिदेशक, भा.भू.स. के संरक्षण में किया गया था । जिसमें सुरज पाटभाजे, अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष, भा.भू.स., मध्य क्षेत्र, नागपुर, शुभ्रशुचि सरकार, उपमहानिदेशक, भा.भू.स., राज्य इकाई : मध्यप्रदेश, तथा संजय वानखड़े, निदेशक एवं कार्यालयाध्यक्ष, भा.भू.स., भोपाल क्रमशः आयोजक, सह आयोजक तथा आयोजन सचिव रहे ।