
मंगलवार को भोपाल जनजातीय संग्रहालय में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की। एनपी नामदेव ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के पूर्व धरती पर प्रकट हुए श्रीबलराम को हलधर के रूप में कृषि संस्कृति का जनक माना जाता है। उनकी प्रतीकात्मकता संगठित और व्यवस्थित कृषि व्यवस्था की स्थापना का संदेश देती है। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं पशुपालन, पशु-रोग निवारण और संरक्षण के महत्व को दर्शाती है।
श्रीराम तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में यह आयोजन भक्ति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का संगम होगा। मंदिरों में मटकी-फोड़, रास-लीला, भजन संध्या, साज-सज्जा एवं शृंगार प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। उत्कृष्ट शृंगार के लिए 1.50 लाख रुपए के तीन, 1 लाख रुपये के पांच और 51 हजार रुपये के सात पुरस्कार दिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, प्रदेश के सभी होटलों में जन्माष्टमी उत्सव मनाने की अनोखी पहल की जाएगी और समय-समय पर गीता भवनों की स्थापना के लिए भूमिपूजन भी होगा। संस्कृति विभाग का यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करेगा, बल्कि मप्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मुख्य कार्यक्रम मुख्यमंत्री के निवास पर दोपहर 2 बजे से आयोजित होगा, जिसमें 1000 से अधिक बाल गोपाल श्रीकृष्ण की वेशभूषा में अपने परिजनों के साथ शामिल होंगे। इस अवसर पर इस्कान मंदिर के माध्यम से गोपाल कृष्ण का अभिषेक होगा। मुख्यमंत्री द्वारा पधारे मान्य अतिथिगण और सहभागीगण तथा उनके साथ बाल गोपालों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल का विग्रह एवं हर घर गोकुल, घर घर गोपाल प्लेकार्डस तथा मोरपंख भेंट किए जाएंगे।