
भोपाल में जन्माष्टमी पर 'श्रीकृष्ण पर्व एवं लीला पुरुषोत्तम का प्रकट उत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री आवास पर श्रीकृष्ण से जुड़ी लीलाओं की आकर्षक प्रस्तुति होंगी। इस मौके पर लड्डू गोपाल की 2000 प्रतिमाएं वितरित की जाएंगी।
रात में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होंगे। वे भगवान श्रीकृष्ण से जुडे़ 2 अन्य स्थान अमझेरा और जनापाव भी पहुंचेंगे।
इससे पहले भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थल, प्रदेश के प्रमुख मंदिर, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को प्रदर्शित करते हुए राज्य सरकार ने 14 अगस्त को बलराम जयंती का आयोजन किया था।
गोपाल मंदिर उज्जैन : सोमनाथ का ऐतिहासिक दरवाजा लगा है उज्जैन के गोपाल मंदिर में रात में जन्माष्टमी पर्व खास रहता है। गोपाल मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से बनी श्रीकृष्ण की अद्वितीय प्रतिमा स्थापित है। द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर का निर्माण दौलतराव सिंधिया की पत्नी बायजा बाई ने कराया था।
गोपाल मंदिर का मुख्य दरवाजा ऐतिहासिक महत्व का है। इतिहासकारों के अनुसार, मोहम्मद गजनवी ने जब सोमनाथ मंदिर को लूटा तो वह अपने साथ मंदिर के दरवाजे भी ले गया। इन दरवाजों पर कई बहुमूल्य रत्न जड़े हुए थे। बाद में इन दरवाजों को अहमद शाह अब्दाली ने लूट लिया।
इसके बाद ये दरवाजे मराठा शासक महादजी शिंदे के पास आ गए। महादजी शिंदे ने ये दरवाजे कैसे प्राप्त किए, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। बाद में इन दरवाजों को सिंधिया राजवंश ने उज्जैन स्थित गोपाल मंदिर में लगवा दिया था।
जनापांव : परशुराम से श्रीकृष्ण ने लिया था सुदर्शन मान्यता है कि जानापांव भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। यह इंदौर के महू के पास स्थित है। जहां विनम्रता और श्रद्धा से परशुराम जी से सुदर्शन चक्र भगवान श्री कृष्ण ने प्राप्त किया था। जानापांव वो स्थान है, जहां कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण 12-13 साल थे, तब परशुराम से मिलने उनकी जन्मस्थली जानापांव (इंदौर) गए थे।
वहां परशुराम ने कृष्ण को उपहार में सुदर्शन चक्र दिया। शिव ने यह चक्र त्रिपुरासुर वध के लिए बनाया था और विष्णुजी को दे दिया था। कृष्ण के पास आने के बाद यह उनके पास ही रहा।
+अमझेरा (धार) : श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया
मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जिस स्थान से माता रुक्मिणी का हरण किया था, वो अमका-झमका मंदिर धार जिले के अमझेरा में स्थित है। यह मंदिर 7000 साल पुराना है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मंदिर रुक्मिणी जी की कुलदेवी का था। वो यहां पूजा करने आया करती थी।
सन 1720- 40 में इस मंदिर का राजा लाल सिंह ने जीर्णोद्धार करवाया था। पौराणिक युग में इस स्थान को कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। रुक्मिणि वहीं के राजा की पुत्री थीं। उसके बाद मंदिर के नाम से जगह को अमझेरा नाम दिया गया।