यास्मिन कराचीवाला टाईप 2 डायबिटीज़ पीड़ितों को दे रही हैं जीवनशैली के सुझाव

Updated on 27-06-2023 01:49 AM
भोपाल : डायबिटीज़ आज एक आम समस्या बन चुकी है जिसका कारण अस्वस्थ जीवनशैली खराब खान-पान व्यायाम की कमी आदि हैं रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में डायबिटीज़ से पीड़ित हर छठवाँ व्यक्ति भारत में है ये बहुत ही चिंताजनक आँकड़े हैं क्योंकि इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन के मुताबिक हमारे देश में 2045 तक 134 मिलियन लोग डायबिटीज़ से पीड़ित होंगे इस बढ़ती समस्या को रोका जा सकते हैं, जिसके लिए डॉक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए कुछ सरल उपाय करने होंगे। 
बादाम खाएं नियमित रूप से बादाम खाने से खून में शुगर के स्तर में फायदा होता है इसके अलावा अस्वास्थ्यकर आहार को बादाम जैसे सेहतमंद विकल्प से बदलकर वजन भी नियंत्रण में रहता है बादाम में कम ग्लाईसेमिक इंडैक्स होता है, और ये प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। इसलिए बादाम खाने से जंक फूड खाने की इच्छा कम हो जाती है, पेट भरा रहता है, और माँसपेशियाँ भी अच्छी बनती हैं। बादाम में अनेक पोषक तत्व, जैसे प्लांट प्रोटीन, डायटरी फाईबर, अच्छे फैट और महत्वपूर्ण विटामिन एवं मिनरल, जैसे विटामिन ई, मैग्नीसियम, और पोटेसियम पाए जाते हैं, जिसके कारण ये प्रि डायबिटीज़ और टाईप 2 डायबिटीज़ के पीड़ितों के लिए बहुत ही अच्छे आहार हैं। बादाम प्रतिदिन आहार में लिए जाने पर स्वास्थ्य को कई फायदे पहुँचाते हैं। ये वजन नियंत्रण और हृदय को स्वस्थ्य स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, सब्जियाँ, फल, और साबुत अनाज डायबिटीज़ के नियंत्रण में फायदेमंद होते हैं।
नियम से पूरी नींद लें - पूरी नींद लेने से डायबिटीज़ के अलावा कई और समस्याएं भी ठीक हो सकती हैं। आधी अधूरी नींद लेने से शरीर में इंसुलिन का रज़िस्टैंस बढ़ जाता है। इसलिए यदि आप हर रोज रात में 7 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो डायबिटीज़ को संभालना मुश्किल हो जाता है। इससे आपको अगले दिन भूख ज्यादा लगती है, और खाने के बाद तृप्ति भी कम मिलती है। इसलिए नियमित रूप से अच्छी नींद लेना डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए बहुत जरूरी है। रात में अच्छी नींद लेकर व्यक्ति अगले दिन ज्यादा चुस्त रहता है, शरार में ज्यादा ऊर्जा बनी रहती है, और तनाव कम रहता है। इसलिए डायबिटीज़ की निगरानी और उसके नियंत्रण के लिए मानसिकता भी बेहतर बनी रहती है।
वजन और इंसुलिन को नियंत्रण में रखने के लिए व्यायाम करें - मोटापा टाईप 2 डायबिटीज़ के मुख्य कारणों में से एक है। इसलिए अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करना बहुत जरूरी है। नियमित व्यायाम खून में शुगर का लेवल नियंत्रण में रखता है और हृदयरोग एवं नसों को क्षति का जोखिम कम करता है। इसलिए प्रतिदिन अपनी पसंद के किसी भी व्यायाम, जैसे दौड़ने, तैरने, एरोबिक्स करने, कोई डांस करने को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 03 March 2026
भोपाल : भारत में बेहतरीन नेत्र चिकित्सा प्रदान करने के अपने संकल्प को मजबूत करते हुए, डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ने भोपाल में अपना नया अत्याधुनिक नेत्र अस्पताल का शुभारंभ…
 21 February 2026
बेंगलुरु : भारत का पहला 100% एफडीआई-वित्तपोषित तृतीयक देखभाल अस्पताल, सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल ने आज अपने उन्नत और एकीकृत इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर एंड ब्लड डिसऑर्डर्स का शुभारंभ किया। यह समर्पित केंद्र सटीकता-आधारित, तकनीक-सक्षम…
 21 February 2026
इंदौर: भारत में महिलाओं और बच्चों के प्रमुख हॉस्पिटल, मदरहुड हॉस्पिटल्स ने इंदौर में अपना दूसरा हॉस्पिटल राजीव गांधी चौक पर शुरू किया। यह हॉस्पिटल मध्य भारत में महिलाओं और…
 08 February 2026
भोपाल : हेल्दी वर्ल्ड विज़न फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस का आयोजन 7–8 फरवरी 2026 को पंडित खुशीलाल शर्मा आयुष ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ…
 08 February 2026
भोपाल : भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में देश के वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. ए के द्विवेदी ने कहा कि एनीमिया जागरूकता के क्षेत्र में वर्षों से चल रहा…
 04 February 2026
इंदौर।आँखों की सर्जरी के क्षेत्र में रोहित आई हॉस्पिटल, इंदौर फिर एक बार तकनीकी प्रगति की नई ऊंचाई छूने जा रहा है। रोहित आई हॉस्पिटल के एक्सपर्ट सर्जन अब अत्याधुनिक यूनिटी वीसीएस…
 03 February 2026
इंदौर। तेज़, सुरक्षित और कम दर्द वाले इलाज की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सेंटर ऑफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल केयर (CVIC) द्वारा इंदौर में 7 और 8 फरवरी को सीवीआईसी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट 2026 का आयोजन किया जा…
 31 January 2026
इंदौर। 2026 के तीसरे दिन इंदौर में चिकित्सा विज्ञान का ऐसा भविष्य दिखाई दिया, जहां इंसानी अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथ मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ते नजर आए। सुबह से…
 29 January 2026
भोपाल : स्ट्रोक के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, मरीज के बचने और रिकवरी की संभावनाओं को काफी हद तक तय करता है। इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के मुताबिक, भारत में…
Advt.