
मप्र में प्रति लाख आबादी पर बैंक खाते गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों से ज्यादा हैं। लेकिन इन खातों में जमा राशि 21 राज्यों में सबसे कम है। आंकड़े बताते हैं, मप्र में जुलाई तक 3.78 करोड़ बैंक खाते खोले गए। इसमें 31 लाख खातों का संचालन बैंक के लिए भारी पड़ रहा है। क्योंकि इनमें एक रुपया भी बैलेंस नहीं है।
यह बातें 29 जुलाई को होने वाली एक विशेष बैठक के एजेंडा में शामिल हो सकती हैं। यह बैठक देश की 5 ट्रिलियन डॉलर (400 लाख करोड़ रु.) इकॉनॉमी में राज्य की सहभागिता बढ़ाने के लिए आयोजित की गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठक में शामिल होंगे। बैंकों के कामकाज की समीक्षा के लिए रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एमके जैन भी आएंगे।
अगले एक साल में 54 नई बैंक शाखाएं खोली जानी हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो इससे आर्थिक विकास में खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। वजह : खातों में पैसा ही नहीं आएगा तो खाते खोलने से क्या फायदा। आरबीआई ने जीरो बैलेंस खातों को मेंटेन करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए खाताधारकों को 10 हजार रुपए के कर्ज की सुविधा दी थी। ज्यादातर खाताधारकों ने यह कर्ज लिया। लेकिन बैंकों ने जैसे ही खाते में पैसा डाला, उन्होंने एटीएम के जरिए निकाल लिया।