भोपाल : राजधानी भोपाल एक बार फिर राष्ट्रीय चिकित्सा जगत का केंद्र बना, जब जहांनुमा पैलेस में भोपाल इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं गैस्ट्रोकेयर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा आयोजित 11वां एनुअल नेशनल कॉन्फ्रेंस बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन का भव्य शुभारंभ हुआ। देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, फिजिशियन, सर्जन और युवा डॉक्टरों की मौजूदगी में संक्रमण से जुड़ी आधुनिक चुनौतियों और उपचार की नई दिशाओं पर मंथन शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सम्मेलन के पहले दिन विशेषज्ञों ने साफ कहा कि आज संक्रमण केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बदलती चिकित्सा चुनौती है, जिसमें समय पर पहचान, सही एंटीबायोटिक उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन सबसे अहम है। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान लगातार बदल रहा है और संक्रमण के क्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में डॉक्टरों का अपडेट रहना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि यह मंच अनुभव, शोध और आधुनिक ज्ञान को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। पहले वैज्ञानिक सत्र में इन्फेक्शन और इंफ्लेमेशन में अंतर कैसे पहचाना जाए तथा सीआरपी और पीसीटी जांच की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार संक्रमण और सूजन के लक्षण समान दिखाई देते हैं, जिससे गलत उपचार का खतरा बढ़ जाता है। सही जांच और क्लिनिकल समझ से बेहतर निर्णय लिया जा सकता है। इसके बाद रेजिस्टेंट इंफेक्शन के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के अनुचित उपयोग से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बनते जा रहे हैं, जो आने वाले समय में गंभीर संकट बन सकता है। डॉक्टरों ने जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग पर जोर दिया विशाखापट्टनम से आए डॉ. चालापथि राव आचार्य ने कहा, "ऐसे राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन केवल ज्ञान साझा करने का मंच नहीं होते, बल्कि यह भविष्य की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा तय करते हैं। देशभर के विशेषज्ञ जब एक मंच पर अपने अनुभव, शोध और नई उपचार पद्धतियां साझा करते हैं, तब मरीजों को उसका सीधा लाभ मिलता है। संक्रमण और गैस्ट्रो रोगों जैसे तेजी से बदलते विषयों में डॉक्टरों का लगातार अपडेट रहना बेहद आवश्यक है। बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन जैसे आयोजन युवा चिकित्सकों को सीखने, वरिष्ठ विशेषज्ञों से जुड़ने और आधुनिक चिकित्सा दृष्टिकोण अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।" हैदराबाद से आए डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा, "गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं, क्योंकि दूषित भोजन, असुरक्षित पानी, खराब स्वच्छता और अनियंत्रित एंटीबायोटिक उपयोग इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। पेट और आंतों के संक्रमण कई बार साधारण समस्या लगते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह डिहाइड्रेशन, लीवर जटिलताओं, आंतों की सूजन और गंभीर संक्रमण का रूप ले सकते हैं। सही जांच, संतुलित दवा उपयोग, स्वच्छ खानपान और जागरूकता के माध्यम से इन संक्रमणों को काफी हद तक रोका जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा का उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है।" कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने कहा, " भारत जैसे बड़े देश में संक्रमण से जुड़ी बीमारियां आज भी लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। पेट, लिवर, आंत, फेफड़े और शरीर के अन्य अंगों में संक्रमण कई बार गंभीर रूप ले लेता है। समय पर पहचान और सही इलाज से ऐसी जटिलताओं को रोका जा सकता है। यही कारण है कि इस वर्ष कॉन्फ्रेंस को संक्रमण विषय पर केंद्रित किया गया है। जब डॉक्टर सीखना बंद कर देता है, तब उपचार आगे बढ़ना बंद हो जाता है। इसलिए निरंतर अपडेट रहना जरूरी है। संक्रमण के खिलाफ लड़ाई केवल दवाओं से नहीं, सही जानकारी और सही समय पर उपचार से जीती जाती है।" उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य मरीजों तक बेहतर इलाज पहुंचाने के लिए डॉक्टरों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान और तकनीकों से जोड़ना है। "पहले दिन आयोजित पैनल डिस्कशन में एक्यूट कोलेंजाइटिस, एच. पाइलोरी, लिवर एब्सेस और हेपेटाइटिस बी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। जटिल मरीजों के केस स्टडी, नई गाइडलाइंस और सफल उपचार पद्धतियों पर खुलकर चर्चा हुई। आईबीडी केस स्ट्रिप्स सत्र में यह बताया गया कि आंतों की बीमारी वाले मरीजों में कब संक्रमण की आशंका समझनी चाहिए और इलाज की दिशा कैसे तय की जाए। यह सत्र युवा डॉक्टरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी रहा। दिन के अंतिम प्रमुख सत्र एब्डॉमिनल टीबी सिम्पोजियम में पेट की टीबी के विभिन्न रूप, मेडिकल थेरेपी से आगे बढ़ चुके मामलों, ऑब्स्ट्रक्शन, परफोरेशन और कोकून जैसी जटिल स्थितियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत जैसे देश में एब्डॉमिनल टीबी अभी भी बड़ी चुनौती है और जल्दी पहचान अत्यंत आवश्यक है। देश के कई शहरों जैसे दिल्ली, इंदौर, नागपुर, जोधपुर, रायपुर, भोपाल, भुवनेश्वर, बेंगलुरु, हैदराबाद और विशाखापट्टनम से आए विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया। वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ युवा चिकित्सकों और पीजी विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता की। सम्मेलन के पहले दिन ज्ञानवर्धक सत्रों, संवाद और व्यावहारिक अनुभवों का सफल संगम देखने को मिला। आयोजकों के अनुसार दूसरे दिन भी संक्रमण चिकित्सा, एंडोस्कोपी से जुड़े संक्रमण, डायरिया मैनेजमेंट, लीवर सिरोसिस, सेप्सिस और आधुनिक उपचार तकनीकों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। भोपाल में हो रहा यह सम्मेलन केवल डॉक्टरों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।