बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन ने चिकित्सा जगत को नई ऊर्जा, सोच और दिशा प्रदान की : डॉ. संजय कुमार

Updated on 26-04-2026 07:45 PM
भोपाल :  भोपाल में आयोजित 11वां एनुअल नेशनल कॉन्फ्रेंस बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन आज अपने सफल समापन के साथ समाप्त हुआ। भोपाल इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं गैस्ट्रोकेयर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा जहांनुमा पैलेस में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन ने संक्रमण चिकित्सा, गैस्ट्रो रोगों और आधुनिक उपचार विज्ञान को नई दिशा देने का कार्य किया। देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और युवा डॉक्टरों ने अंतिम दिन भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन की शुरुआत हेल्थ एवं वेलनेस सत्र से हुई, जिसमें चिकित्सकों और प्रतिभागियों ने फिटनेस एवं सक्रिय जीवनशैली के महत्व को समझा। इसके बाद वैज्ञानिक सत्रों का क्रम प्रारंभ हुआ। पहले प्रमुख सत्र में एक्यूट वॉटररी डायरिया के एल्गोरिथमिक अप्रोच पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्मियों और मानसून के समय दस्त के मामलों में तेजी आती है, ऐसे में समय पर फ्लूड मैनेजमेंट, संक्रमण की पहचान और उचित उपचार अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद आयोजित एंडोस्कोपी एंड इंफेक्शंस सिम्पोजियम में एंडोस्कोप उपकरणों की सफाई, डिसइन्फेक्शन, रीप्रोसेसिंग और संक्रमण रोकथाम के आधुनिक प्रोटोकॉल पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा के लिए उपकरणों की स्वच्छता उतनी ही जरूरी है जितनी सफल प्रक्रिया।
इन्फेक्शंस इन सिरोसिस विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में लीवर सिरोसिस मरीजों में होने वाले संक्रमण, समय पर पहचान और जीवनरक्षक उपचार पद्धतियों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मरीजों में छोटी लापरवाही भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसके बाद एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में संक्रमण कब और कैसे मैनेज करें विषय पर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें डॉक्टरों ने गंभीर पैंक्रियाज संक्रमण के मामलों में मेडिकल और इंटरवेंशनल रणनीतियों पर विचार साझा किए। सम्मेलन का सबसे चर्चित सत्र मैनेजिंग सेप्सिस इन 2026 रहा, जिसमें एआई आधारित जांच तकनीकों, नए डायग्नोस्टिक टेस्ट और बदलती उपचार रणनीतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में संक्रमण की शुरुआती पहचान और सही उपचार निर्णय में बड़ी भूमिका निभाएगी। एंटीबायोटिक्स रेशनैलिटी एंड स्टेवार्डशिप विषय पर डॉक्टरों ने चेताया कि अनियंत्रित एंटीबायोटिक उपयोग भविष्य में दवा प्रतिरोधक संक्रमणों को और बढ़ा सकता है। जिम्मेदार उपयोग, सही डोज और वैज्ञानिक गाइडलाइन का पालन आज समय की आवश्यकता है। अंतिम सत्रों में लिवर की हायडेटिड डिजीज, एडल्ट वैक्सीनेशन, न्यूट्रोपेनिक मरीजों में डायरिया मैनेजमेंट, एंटेरिक फीवर में पिछले 50 वर्षों के बदलाव, अपर जीआई संक्रमण, हेपेटाइटिस ए और ई की बदलती स्थिति तथा बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले डायरिया जैसे विषयों पर व्याख्यान हुए।
दिल्ली से आए डॉ. मृदुल कुमार डागा ने कहा, "संक्रमण चिकित्सा का स्वरूप लगातार बदल रहा है और आज डॉक्टरों के लिए केवल पारंपरिक उपचार ज्ञान पर्याप्त नहीं है। नई बीमारियां, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, जटिल मरीजों की बढ़ती संख्या और तेजी से विकसित होती तकनीकें हमें लगातार सीखने के लिए प्रेरित करती हैं। ऐसे सम्मेलन विशेषज्ञों के अनुभव, नई रिसर्च और व्यावहारिक क्लिनिकल रणनीतियों को साझा करने का श्रेष्ठ मंच हैं। बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन जैसे आयोजन चिकित्सा समुदाय को एकजुट कर बेहतर मरीज देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।" भोपाल  के  डॉ. सी. सी. चौबल ने कहा, "आज के समय में संक्रमण प्रबंधन केवल दवा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर पहचान, सटीक जांच, बहु-विषयक दृष्टिकोण और आधुनिक उपचार रणनीतियों का समन्वय आवश्यक है। ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन डॉक्टरों को नई रिसर्च, उन्नत तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ते हैं। बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन जैसे आयोजन चिकित्सा जगत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं और मरीजों को बेहतर, सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार देने की दिशा मजबूत करते हैं।"  इंदौर से आए डॉ. रवि डोसी ने कहा, "ऐसे राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन ज्ञान, अनुभव और नवाचार के संगम होते हैं। जब देशभर के विशेषज्ञ एक मंच पर मिलकर संक्रमण, गैस्ट्रो रोगों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा करते हैं, तो उसका लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचता है। बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन जैसे आयोजन डॉक्टरों को नवीनतम शोध, बदलती गाइडलाइंस और बेहतर क्लिनिकल निर्णय क्षमता से जोड़ते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखना ही उत्कृष्ट उपचार की सबसे मजबूत नींव है।" भोपाल के  डॉ. वी. के. रामनानी ने कहा, "संक्रमण चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और नई तकनीकों को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। आधुनिक डायग्नोस्टिक सिस्टम, एआई आधारित विश्लेषण, तेज लैब जांच और उन्नत मॉनिटरिंग तकनीकें मरीजों की जल्दी पहचान और सटीक उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि तकनीक से समर्थित निर्णय भी उतने ही जरूरी हैं। यदि हम नई चिकित्सा तकनीकों को सही प्रशिक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनाएं, तो गंभीर संक्रमणों से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"  कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने समापन अवसर पर कहा कि संक्रमण चिकित्सा का क्षेत्र लगातार बदल रहा है और ऐसे सम्मेलन डॉक्टरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल में देशभर के विशेषज्ञों का एक मंच पर आना शहर के लिए गौरव की बात है। समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद वोट ऑफ थैंक्स और फेयरवेल लंच के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। दो दिनों तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि संक्रमण से लड़ाई केवल दवाओं से नहीं, बल्कि ज्ञान, समय पर पहचान, तकनीक और सामूहिक चिकित्सा प्रयासों से जीती जा सकती है। भोपाल में आयोजित बिग अपडेट 2026 इंफेकॉन ने चिकित्सा जगत को नई ऊर्जा, नई सोच और नई दिशा प्रदान की।


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