
पनागर,जबलपुर (सोनू शर्मा) : काली, कालिका या महाकाली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वे मृत्यु, काल और परिवर्तन की देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती पार्वती का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति असुरों के संहार के लिये हुई थी। काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है वैष्णो देवी में दाईं पिंडी माता महाकाली की ही है |
काली देवी के समान ही चण्डी देवी को माना जाता है। ये कभी कभी दयालु रूप में और प्रायः उग्र रूप में पूजी जाती हैं। दयालु रूप में वे उमा, गौरी, पार्वती, अथवा हैमवती, शताक्षी, शाकम्भरी देवी, अन्नपूर्णा, जगन्माता और भवानी कहलाती हैं। भयानक रूप में दुर्गा, काली और श्यामा, चण्डी अथवा चण्डिका, भैरवी, छिन्नमस्ता आदि के नाम से जाना जाता है। भारतीय दर्शन में शक्ति को दिव्य और अत्यंत उदात्त माना गया है. माता के चंडी रूप को दुष्टों और कष्टों के संहारक के रूप में भी देखा जाता है. चण्डी पूजा विशेष समारोह के द्वारा मनायी जाती है।
पनागर,जबलपुर के ग्राम बिझुआ में 17.11.22 को चण्डी पूजा मेला लगा. जिसमे राजेश पटेल, पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत व "प्रतिनिधि" मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी, विवेक पटेल जिला पंचायत उपाध्यक्ष, अशोक पटेल, पप्पू भैया, रविशंकर शर्मा,अमित पटेल,कमलेश शर्मा, चिराग पटेल,राहुल शर्मा ,धर्मेन्द्र पटेल सहित बिझुआ ग्राम के अलावा आसपास के गाव के ग्रामीण भी मेले में पधारे।