कोयले की कमी से प्रदेश के तापगृहों की सांसें उखडऩे लगी

Updated on 27-04-2022 05:35 PM

भोपाल बिजली की कमी ने प्रदेश सरकार की तैयारियों की पोल खोल दी है। वैसे तो प्रदेश में 22 हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता के दावे किए जा रहे थे लेकिन साढ़े 12 हजार मेगावाट बिजली की मांग पहुंचते ही संकट खड़ा हो गया। बिजली मामलों के जानकर अब सवाल कर रहे हैं कि जब प्रदेश के पास 22 हजार मेगावाट बिजली का करार है तो फिर संकट क्यों हो रहा है। इधर मप्र पावर जनरेशन कंपनी के तापगृह में भी महज चार दिन का कोयला ही बचा हुआ है। जिससे साफ है कि फुल लोड पर इकाईयां चली तो उन्हें कोयले की कमी के कारण बंद करना पड़ सकता है। बीते 22 अप्रैल को प्रदेश में हर घंटे बिजली की कमी के कारण अघोषित कटौती की गई।

प्रदेश में बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह कोयला है। माइंस से रेलवे की रैक पर्याप्त नहीं मिल पा रहे हैं इस वजह से कमी है। ज्यादातर इकाईयां कोयले से बिजली बनाती है। इसके अलावा बिजली की बैकिंग इस समय होती है क्योंकि रबी सीजन के लिए ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। कुछ बिजली को अन्य एक्सचेंज के जरिए बेचा जा रहा है। ऐसे में कृत्रिम बिजली की कमी बनी हुई है।

22 हजार मेगावाट नहीं उपलब्धता

 प्रदेश सरकार के बिजली उपलब्धता के 22 हजार मेगावाट के दावे पर प्रबंध संचालक मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी विवेक पोरवाल ने कहा कि 22 हजार मेगावाट अलग-अलग श्रेणी में बिजली के करार है। कोयला से बनने वाली बिजली का 14 हजार मेगावाट हिस्सा है जिसमें 80 फीसद ही इकाई से बिजली उत्पादन होता है जो करीब 10-11 हजार मेगावाट है। इसके अलावा हवा,न्यूिक्लियर, सोलर से बिजली मिलती है। कई बार मौसम और हवा नहीं चलने से इनका हिस्सा पर्याप्त नहीं मिलता है। विवेक पोरवार के अनुसार प्रदेश में कहीं कोई बिजली का संकट नहीं है। कभी थोड़ी कमी होती है तो एक्सचेंज के जरिए खरीद ली जाती है। उन्होंने माना कि रबी सीजन के लिए प्रदेश में 600 मेगावाट बिजली बैकिंग की जा रही है वहीं कुछ बिजली बेच रहे हैं। कोयले की कमी को लेकर भी कहा कि इस बारे में उनके पास बहुत बेहतर जानकारी नहीं है लेकिन कोयले की कमी नहीं है।

282 से 1600 मेगावाट तक हुई कमी

 मप्र में विगत 22 अप्रैल को रात्रि 12 बजे से हर घंटे बिजली की कमी बनी रही। इसमें सिर्फ सुबह 9 बजे 11 बजे के बीच बिजली मांग के अनुरूप मिली। इसके अलावा कमी के दौरान अघोषित कटौती की गई। शाम सात बजे सबसे कम 282 मेगावाट की कमी बनी रही। उस वक्त 11138 मेगावाट की मांग प्रदेश में थी। इसके बाद सबसे ज्यादा कमी शाम चार बजे 1612 मेगावाट की हुई। उस समय बिजली की दिन की सर्वाधिक मांग 12680 मेगावाट थी। बिजली विभाग के निर्धारित मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कटौती के माध्यम से पूरा किया गया। गांव में बिजली की अघोषित कटौती 4-5 घंटे की हुई।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 06 June 2026
इंदौर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA), इंदौर सेंटर द्वारा आयोजित कार्यशाला “फ्यूचर बाय डिज़ाइन: द थर्ड आई – बियॉन्ड बाउंड्रीज़” का सफल आयोजन किया…
 04 June 2026
इंदौर। शहर के लोकप्रिय कैफ़े ब्रांड द क्रश कॉफी ने अपने ग्राहकों के लिए एक नए और अनूठे अनुभव की शुरुआत करते हुए संडे ब्रंच लॉन्च करने की घोषणा की…
 03 June 2026
इंदौर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ आर्किटेक्टस (IIA), इंदौर सेंटर द्वारा एक विशेष आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने…
 25 May 2026
इंदौर: गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल अब सिर्फ कटे हुए आम या पारंपरिक मिठाइयों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए फ्लेवर, फ्यूजन और खास प्रस्तुतियों के साथ मेहमानों की थाली…
 23 May 2026
इंदौर। शहर की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक पहचान को एक नई ऊंचाई देते हुए इंदौर के रंगशाला प्रॉडक्शन के बैनर तले निर्मित आध्यात्मिक फिल्म “आस्था का अतिशय : महिमा स्वस्तिधाम की” का ट्रेलर…
 18 May 2026
बदलते दौर के साथ सबकुछ बदल चुका है। संगीत भी और भक्ति करने का तरीका भी। युवाओं को मॉडर्न संगीत पसंद है और यही कारण है कि वे भारतीय भक्ति…
 18 May 2026
उज्जैन - शनि जयंती और ज्येष्ठ मास की शनि अमावस्या का दुर्लभ संयोग, जो पिछले 13 वर्षों में एक साथ नहीं आया था, इस बार उज्जैन स्थित नवग्रह शनि मंदिर…
 16 May 2026
इंदौर: इंदौर में इस बार की गर्मी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और तापमान 45°C के पार पहुंच गया है। ऐसे में दाऊदी बोहरा समुदाय ने शहरभर में…
 16 May 2026
इंदौर। दक्षिण भारत का खाना लंबे समय तक सिर्फ डोसा, इडली और सांभर तक सीमित समझा जाता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लोगों की पसंद तेज़ी से बदली है।…
Advt.