
भारत में मुर्गीपालकों और कुक्कुट उद्योग के लिए हर साल बड़ी मुसीबत बनने वाला बर्ड फ्लू यानी एवियन एन्फ्लुएंजा (एच-9 एन-2) का लो पैथोजैनिक वायरस अब ज्यादा नहीं सताएगा। इस वायरस को खत्म करने वाली पहली स्वदेशी वैक्सीन भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) ने बना ली है।
इस वैक्सीन को सोमवार को संस्थान के नौवें स्थापना दिवस पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक पशु रोग डॉ. भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी लॉन्च करेंगे। इसके बाद टीके का देश में व्यावसायिक निर्माण शुरू हो जाएगा। बता दें कि हर साल एच9एन2 के लो पैथोजैनिक वायरस से लाखों मुर्गियां बांझ हो जाती हैं और कई सांस की बीमारी के बाद मर जाती हैं। इस वायरस को रोकने के लिए अब तक विदेश से टीका मंगाना पड़ता है, लेकिन अब ये टीका देश में ही बनेगा।
ऐसे बनाया टीका
प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक यह टीका भारत में संक्रमण फैलाने वाले विलगित (आइसोलेट) वायरस को पूर्णत: निष्क्रिय कर तैयार किया गया है। ये छह महीने तक मुर्गियों को सुरक्षा कवच देगा। ये एच9एन2 के सभी एंटीजेनेकली डायवर्जेंट स्ट्रेन पर कारगर है। भारत में एच9एन2 वायरस संक्रमण के मामले साल 2003 से सामने आ रहे हैं। इससे कुक्कुट उद्योग को हर साल भारी नुकसान होता है।
हाई-पैथोजन के टीके पर जारी है रिसर्च
एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस दो प्रकार का होता है। हाई पैथोजैनिक और लो पैथोजैनिक। हाई पैथोजैनिक एवियन इन्फ्लुएंजा मुर्गियों में मृत्यु दर काफी अधिक (100% तक) होती है। इसलिए इसके प्रकोप से प्रभावित पक्षियों को मारकर दफन करना पड़ता है। जबकि लो पैथोजैनिक एवियन इन्फ्लुएंजा के संक्रमण से अंडा उत्पादन में कमी (50% तक), सांस की बीमारी और मृत्यु दर (5 से 6%) तक होती है। हाई पैथोजन वायरस के टीके पर अभी रिसर्च जारी है, इसका टीका भी जल्द आने की संभावना है।