
दो केंद्रीय मंत्रियों, दो पूर्व मंत्रियों और कुछ वरिष्ठ नेताओं के कारण भाजपा छह जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बनवा पाई। इसे आलाकमान ने गंभीरता से लिया है। साथ ही इसकी जानकारी शीर्ष स्तर पर भिजवा दी है। इनमें डिंडोरी, दमोह, देवास, बालाघाट, सिंगरौली और नर्मदापुरम शामिल हैं। इन जिलों में सामने आया है कि नेता दामाद, पत्नी या समर्थकों को अध्यक्ष बनवाने में लगे रहे या आपसी कलह हार की वजह बन गई।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक डिंडोरी में केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते दामाद को अध्यक्ष बनवाना चाहते थे, जबकि पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे अपनी पत्नी के लिए अड़े रहे। पार्टी ने समझाने का प्रयास किया, जो विफल हो गया। डिंडोरी कांग्रेस जीत गई। इसी तरह दमोह में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बीच की खींचतान हार की वजह बनी।
मलैया से इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि हमारा प्रत्याशी ही कांग्रेस को वोट कर गया तो क्या करें। बड़वानी में भाजपा ने पूर्व मंत्री अंतरसिंह आर्य की बहू कविता आर्य को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल के बेटे बलवंत पटेल ने बागी होकर नामांकन भर दिया। 14 में से 9 वोट बलवंत को और 5 वोट कविता को मिले। बलवंत पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
तीन दिन तक बनी सीएम हाउस में रणनीति....
जिला-जनपद पंचायतों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए तीन दिन तक पार्टी मुख्यालय और सीएम हाउस अघोषित कंट्रोल रूम बना। बुधवार को पार्टी दफ्तर में तीन घंटे और सीएम हाउस में रात साढ़े दस बजे तक सीएम शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद जीत की रणनीति बनाते रहे। यही हाल गुरुवार को भी रहा। शुक्रवार सुबह 8 बजे फिर सभी सीएम हाउस पहुंच गए।
मंत्री पटेल को बर्खास्त करने की मांग, नारेबाजी
बड़वानी में मंत्री के बेटे द्वारा बगावत करने के बाद पूर्व मंत्री आर्य के समर्थकों व सेंधवा के भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और पटेल को बर्खास्त करने की मांग की। नर्मदापुरम में भी स्थानीय ने क्रॉस वोटिंग करके भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हरवा दिया। दमोह में लोधी जाति से जुड़े समीकरणों के कारण नुकसान हुआ।