विकास के लिए परंपरागत ज्ञान और कौशल का समुचित उपयोग जरूरी : राज्यपाल श्री पटेल

Updated on 29-04-2022 05:24 PM

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हमारे समाज में उपलब्ध परंपरागत ज्ञान और कौशल के समुचित उपयोग से देश का स्वरूप बदला जा सकता है। हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति वाला देश है। यहाँ भविष्य की अपार संभावनाएँ हैं। आवश्यकता अपनी क्षमताओं, दक्षता, संसाधनों और साधनों के समायोजन की है।

राज्यपाल श्री पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सामाजिक उद्यमिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने आईसेक्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तक और केस स्टडी का लोकार्पण भी किया।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि हमारा देश विविधताओं वाला देश है। विविधता में एकता, हमारी ताकत है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विश्व गुरू के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रुप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि "वाइब्रेन्ट गुजरात'' द्वारा उन्होंने उद्यमिता को नया वातावरण उपलब्ध कराया।

जिला स्तर पर रोजगार मेले आयोजित कर उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाने और कृषि के क्षेत्र में कृषि मेलों के द्वारा किसानों के खेत पर जाकर कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा मार्ग-दर्शन देने की पहलों का उल्लेख भी किया। उन्होंने स्थानीय लोगों को उद्योगों में रोजगार देने और प्राकृतिक खेती के द्वारा कृषि को लाभकारी बनाने के प्रयासों पर बल दिए जाने की आवश्यकता बताई।

रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास आधारित विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा लोकल को ग्लोबल बनाने की दिशा में तेजी के साथ कार्य किया जा रहा है। संस्थान उत्तरी-पूर्वी और दक्षिण भारत में भी शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रारम्भ कर रहा है। कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने पहल की है।

टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल इंडिया के सीईओ अरविंद बाली ने कहा कि ऐतिहासिक रुप से भारतीय समाज मूलतः कौशल आधारित समाज था। इसे पुनर्जीवित किया जाना जरूरी है। शिक्षा में कौशल उन्नयन को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए विद्यार्थियों में कौशल की आकांक्षा को बढ़ाना होगा। शिक्षा के साथ ही अप्रेंटिसशिप की व्यवस्था जरूरी है।

आईसेक्ट के सचिव सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने बताया कि आत्म-निर्भर भारत के लिए "वोकल फॉर लोकल'' के परिप्रेक्ष्य में उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सामाजिक-उद्यम, कौशल-विकास, -लर्निंग और क्षेत्र विकास की विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। रायसेन जिले के आस-पास के क्षेत्रों में समर्थ भारत अभियान के तहत युवाओं को आत्म-निर्भर बनाने के प्रयास भी किए गए हैं।

राज्यपाल श्री पटेल द्वारा दीप जला कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। आईसेक्ट संस्था के विकास पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।


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