
सभी जिलों में हुई शिकायतें
पोलिंग बूथों पर रखी वोटर लिस्ट से नाम गायब होने और मतदान केंद्र बदले जाने की शिकायतें लगभग सभी जिलों में हुई। इसके बाद सबसे पहले सत्ताधारी दल BJP ने राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उसका आरोप है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के कारण वोटर्स को भटकना पड़ा, क्योंकि वोटिंग कम होने का सबसे बड़ा झटका BJP को ही लगता दिख रहा है। दरअसल, BJP ने अपना वोट बैंक 10% बढ़ाने के लिए घर-घर दस्तक देने के लिए 'बूथ जीतो-चुनाव जीतो' अभियान चलाया था।
BJP ने वोटर लिस्ट से नाम गायब होने व मतदाता पर्ची नहीं बांटे जाने की जांच करने के लिए आयोग को ज्ञापन सौंपा है। अब आयोग ने इसकी जांच के निर्देश कलेक्टरों को दिए हैं, लेकिन आयोग ने भी राजनीतिक दलों पर सवाल उठाया है। आयोग के एक अफसर के मुताबिक फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से पहले राजनीतिक दलों को कॉपी दी जाती है, तब आपत्ति क्यों नहीं की गई?
उन्होंने कहा- जब वोटर लिस्ट का प्रारूप सामने लाते हैं, तब स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होती है। इसमें राजनीतिक दल की तरफ से वोटर लिस्ट प्रभारी आते हैं। उन्हें इसकी कॉपी दी जाती है, ताकि गड़बड़ी पर उसे सुधारा जा सके। वे आपत्ति दर्ज कराते हैं। उनका शत-प्रतिशत निराकरण करने के बाद ही फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाती है। हालांकि, निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह ने तर्क दिया है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर आखिरी वक्त पर केंद्रीय कर्मचारियों को हटाना पड़ा था। इस वजह से नए कर्मचारी लाने पड़े, उनसे चूक हो सकती है।
एक पन्ने में 30 नाम, 5 को मिली जिम्मेदारी
BJP पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करने की बात करती है। पार्टी का दावा है कि वोटर लिस्ट के प्रत्येक पन्ने में एक बूथ के 30 नाम होते हैं, जिनमें से उस पन्ने से 5 सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई। इनके पास वोटर्स की जानकारी रहती है। बताया जा रहा है कि यूपी के विधानसभा चुनाव में इसी फॉर्मूले ने ही BJP को फिर से सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन मप्र में निकाय चुनाव में यह सिस्टम फेल होता दिखाई दिया।
वार्ड दफ्तरों में पड़े रहे बंडल
भोपाल में घटे मतदान प्रतिशत की बड़ी वजह वोटर पर्ची का न बंटना माना जा रहा है। आरोप अब इलाके के BLO पर लगाए जा रहे हैं, जिन्हें SDM स्तर पर पर्ची बांटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पर्चियां क्यों नहीं बंटी और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक 2160 BLO पर बूथवार मतदाता पर्ची बांटने की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने मतदाता पर्ची ले तो ली, लेकिन इनमें से 25 से 30 % ने ही पर्ची बांटी। चुनाव के दो दिन पहले मामला गर्माया, तो बड़ी संख्या में मतदाता पर्ची उठाकर नगर निगम के वार्ड दफ्तरों में दे दी गई।